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योग: पंचांग का एक अंग जो बतलाता है समय शुभ है या अशुभ

7 सितंबर 2026

योग — यह सूर्य और चन्द्रमा के योग से पैदा होता है। प्राचीन ग्रन्थों में मुहूर्तादि के लिए इसको प्रधान अंग माना गया है। इनकी संख्या 27 बतायी है। योग के साधन का विधान बताते हुए लिखा है कि दैनिक स्पष्ट सूर्य एवं स्पष्ट चन्द्र के योग की कला बनाकर उनमें 800 का भाग देने से लब्धिगत योग होता है। फिर गत और गम्य कला को 60 से गुणाकर रवि-चन्द्र की गति कला योग से भाग देने पर गत और गम्य घटियाँ आती हैं। अभिप्राय यह है कि जब अश्विनी नक्षत्र के आरम्भ से सूर्य और चन्द्रमा दोनों मिलकर 800 कलाएँ आगे चल चुकते हैं तब एक योग बीतता है, जब 1600 कलाएँ आगे चलते हैं तब दो; इसी प्रकार जब दोनों 12 राशियाँ—21600 कलाएँ अश्विनी से आगे चल चुकते हैं तब 27 योग बीतते हैं। क्रम से सभी 27 योग: विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र, वैधृति। ज्योतिषी इन्हें शुभ और अशुभ, दोनों श्रेणियों में बाँटते हैं। सिद्धि, सौभाग्य, शुभ और ध्रुव जैसे योगों को नए काम शुरू करने के लिए उत्तम माना जाता है, जबकि व्यतीपात, परिध और गण्ड जैसे योगों में महत्वपूर्ण कार्य टालने की सलाह दी जाती है। इसीलिए किसी भी मुहूर्त - विवाह हो, गृह प्रवेश हो या नई शुरुआत - से पहले उस दिन का योग जरूर देखा जाता है। ✨ योग बताता है कि आज सूर्य और चंद्रमा की ऊर्जा किस दिशा में बह रही है - उसे पहचानिए, और अपने दिन को उसी लय में ढालिए।