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नक्षत्र: 27 चंद्र नक्षत्र और उनका महत्व

6 सितंबर 2026

ज़्यादातर लोग अपनी राशि को ही पूरी कहानी मान लेते हैं, लेकिन ज्योतिष में चंद्रमा की सटीक स्थिति भी उतनी ही मायने रखती है - और उसे राशि से नहीं, नक्षत्र से मापा जाता है। नक्षत्र कोई एक तारा नहीं है; चंद्रमा जिस मार्ग पर आकाश में घूमता है, उसे 27 बराबर हिस्सों में बाँटा गया है, हर हिस्सा 13°20′ का। हर हिस्से का नाम उसमें मौजूद तारा-समूह पर रखा गया है - शुरुआत के अश्विनी से लेकर अंत के रेवती तक। हर नक्षत्र को आगे 4 चरणों (पाद) में बाँटा जाता है, हर चरण 3°20′ का - यही वजह है कि एक ही नक्षत्र में जन्मे दो लोग भी अलग-अलग चरण के कारण काफी अलग स्वभाव के हो सकते हैं। क्रम से सभी 27 नक्षत्र: अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वभाद्रपद, उत्तरभाद्रपद, रेवती। कोई-कोई अभिजित् को 28वाँ नक्षत्र मानते हैं। ज्योतिर्विदों का अभिमत है कि उत्तराषाढ़ा की अन्तिम 15 घटियाँ और श्रवण के प्रारम्भ की 4 घटियाँ, इस प्रकार 19 घटियों के मानवाला अभिजित् नक्षत्र होता है। यह समस्त कार्यों में शुभ माना गया है। तो अगली बार जब कोई पूछे "आपकी राशि क्या है?", तो याद रखें - वैदिक पद्धति में ज़्यादा सटीक जवाब आपका नक्षत्र है - आकाश का वह हिस्सा जिससे चंद्रमा आपके जन्म के ठीक समय गुजर रहा था।