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पुनर्जन्म, रूपांतरण - मानव शरीर और ब्रह्मांडीय संबंध

4 सितंबर 2026

* पुनर्जन्म और रूपांतरण: आध्यात्म के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मरता है, तो आत्मा एक नए शरीर में प्रवेश करती है, तीन से चार पहरो में रुपांतरण या कायापलट होता है| जन्म का सटीक समय गर्भनाल(नाड़ी छेदन/नाड़ी शोधन/Umbilical Cord) काटे जाने के क्षण को माना जाता है, जब बच्चा शारीरिक रूप से मां से स्वतंत्र हो जाता है। तब कुंडली तैयार की जाती है और उसी के अनुसार भविष्य की भविष्यवाणी की जाती है| * मानव शरीर और ब्रह्मांडीय संबंध: ग्रहों की गति पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित करती है और यह परिवर्तन मानव शरीर को भी प्रभावित करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रह्मांड और मानव शरीर का मूल तत्व एक ही है। शरीर में होने वाला रासायनिक परिवर्तन आत्मा और कर्म के बीच के बंधन को बदल देता है। इसलिए, अच्छे परिवर्तन अच्छे परिणाम देते हैं और बुरे परिवर्तन बुरे परिणाम देते हैं। और यह सब आपके कर्मों के बारे में है।