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12 राशियाँ और उनकी प्रकृति अथवा स्वभाव

8 सितंबर 2026

आकाश में स्थित भचक्र(नक्षत्रों या तारों का समूह) के 360 अंश अथवा 108 भाग होते हैं। समस्त भचक्र 12 राशियों में विभक्त है, अतः 30 अंश अथवा 9 भाग की एक राशि होती है। ✨ हर राशि का अपना स्वभाव है आओ समझते हैं: 1. मेष: पुरुष जाति, चरसंज्ञक, अग्नितत्त्व, पूर्व दिशा की मालिक, मस्तक का बोध करानेवाली, पृष्ठोदय, उग्र प्रकृति, लाल-पीले वर्णवाली, कान्तिहीन, क्षत्रियवर्ण, सभी समान अंगवाली और अल्पसन्तति है। यह पित्त प्रकृतिकारक है, इसका प्राकृतिक स्वभाव साहसी, अभिमानी और मित्रों पर कृपा रखनेवाला है। 12. वृष: स्त्री राशि, स्थिरसंज्ञक, भूमितत्त्व, शीतल स्वभाव, कान्ति रहित, दक्षिण दिशा की स्वामिनी, वातप्रकृति, रात्रिबली, चार चरण वाली, श्वेत वर्ण, महाशब्दकारी, विषमोदयी, मध्यम सन्तति, शुभकारक, वैश्यवर्ण और शिथिल शरीर है। यह अर्द्धजल राशि कहलाती है। इसका प्राकृतिक स्वभाव स्वार्थी, समझ-बूझकर काम करनेवाली और सांसारिक कार्यों में दक्ष होती है। इससे कण्ठ, मुख और कपोलों का विचार किया जाता है। 3. मिथुन: पश्चिम दिशा की स्वामिनी, वायुतत्त्व, तोते के समान हरित वर्णवाली, पुरुष राशि, द्वि-स्वभाव, विषमोदयी, उष्ण, शूद्रवर्ण, महाशब्दकारी, चिकनी, दिनबली, मध्यम सन्तति और शिथिल शरीर है। इसका प्राकृतिक स्वभाव विद्याध्ययनी और शिल्पी है। इससे हाथ, शरीर के कन्धों और बाहुओं का विचार किया जाता है। 4. कर्क: चर, स्त्री जाति, सौम्य और कफ प्रकृति, जलचारी, समोदयी, रात्रि वली, उत्तर दिशाकी स्वामिनी, रक्त-धवल मिश्रित वर्ण, वहुचरण एवं सन्तानवाली है। इसका प्राकृतिक स्वभाव, सांसारिक उन्नति मे प्रयत्नशीलता, लज्जा, कार्यस्थैर्य और समयानुयायिता का सूचक है। इससे वक्ष-स्थल और गुर्दे का विचार किया जाता है। 5. सिंह: पुरुष जाति, स्थिर संज्ञक, अग्नितत्त्व, दिन वली, पित्त प्रकृति, पीत वर्ण, उष्ण स्वभाव, पूर्व दिशाकी स्वामिनी, पुष्ट शरीर, क्षत्रिय वर्ण, अल्प सन्तति, भ्रमण प्रिय और निर्जल राशि है। इसका प्राकृतिक स्वरूप मेष राशि जैसा है, पर तो भी इसमे स्वातन्त्र्य प्रेम और उदारता विशेष रूप से वर्तमान है। इससे हृदयका विचार किया जाता है। 6. कन्या: पिंगल वर्ण, स्त्री जाति, द्वि-स्वभाव, दक्षिण दिशा की स्वामिनी, रात्रि वली, वायु और शीत प्रकृति, पृथ्वीतत्त्व और अल्प सन्तान वाली है। इसका प्राकृतिक स्वभाव मिथुन जैसा है, पर विशेषता इतनी है कि अपनी उन्नति और मान पर पूर्ण ध्यान रखने की यह कोशिश करती है। इससे पेट का विचार किया जाता है। 7. तुला: पुरुष जाति, चर संज्ञक, वायुतत्व, पश्चिम दिशाकी स्वामिनी, अल्पसन्तान वाली, श्याम वर्ण, शीप दयी, शूद्र संज्ञक, दिनवली, क्रूर स्वभाव और पाद जल राशि है। इसका प्राकृतिक स्वभाव विचारशील, ज्ञानप्रिय, कार्य-संपादक और राजनीतिज्ञ है। इससे नाभि के नीचे के अंगों का विचार किया जाता है। 8. वृश्चिक: स्थिर संज्ञक, शुभ्रवर्ण, स्त्री जाति, जलतत्त्व, उत्तर दिशा की स्वामिनी, रात्रिवली, कफ प्रकृति, बहु सन्तति, ब्राह्मण वर्ण और अर्द्ध जल राशि है। इमका प्राकृतिक स्वभाव दम्भी, हठी, दृढप्रतिज्ञ, स्पष्टवादी और निर्मल है। इससे जननेन्द्रिय का विचार किया जाता है। 9. धनु: पुरुष जाति, काचन वर्ण, द्वि-स्वभाव, क्रूर संज्ञक, पित्त प्रकृति, दिन वली, पूर्व दिशा की स्वामिनी, दृढ शरीर, अग्नितत्त्व, क्षत्रिय वर्ण, अल्प सन्तति एव अर्द्ध जल राशि है। इसका प्राकृतिक स्वभाव अधिकार प्रिय, करुणा मय और मर्यादा का इच्छुक है। इससे पैरो की सन्धि तथा जंघााओं का विचार किया जाता है। 10. मकर: चर संज्ञक, स्त्री जाति, पृथ्वीतत्त्व, वात प्रकृति, पिंगल वर्ण, रात्रि वली, वैश्यवर्ण, शिथिल शरीर और दक्षिण दिशाकी स्वामिनी है। इसका प्राकृतिक स्वभाव उच्च दर्शनाभिलाषी है। इससे घुटनों का विचार किया जाता है। 11. कुंभ: पुरुष जाति, स्थिर संज्ञक, वायुतत्त्व, विचित्र वर्ण, शीपदय, अर्द्धजल, त्रिदोप प्रकृति, दिनवली, पश्चिम दिशाकी स्वामिनी, उष्ण स्वभाव, शूद्र वर्ण, क्रूर एव मध्यम सन्तान वाली है। इसका प्राकृतिक स्वभाव विचारशील शांतचित्त, धर्मवीर और नवीन बातों का आविष्कारक है। इससे पेट के भीतरी भागों का विचार किया जाता है। 12. मीन: द्वि-स्वभाव, स्त्रो जाति कफ प्रकृति, जलतत्रव, रात्रिवली, विप्रवर्ण, उत्तर दिशाकी स्वामिनी और पिगल रग है। इसका प्राकृतिक स्वभाव उत्तम, दयालु और दान-शील है। यह सम्पूर्ण जलराशि है। इससे पैरों का विचार किया जाता है। उपर्युक्त बारह राशियों का जैसा स्वरूप बतलाया है, इन राशियों मे उत्पन्न पुरुष और स्त्रियों का स्वभाव भी प्रायः वैसा ही होता है। जन्मकुण्डली में राशि और ग्रहों के स्वरूप के समन्वय से ही फलाफल का विचार किया जाता है। दो व्यक्तियो की या वर कन्या की सामंजस्यता अथवा पारस्परिक स्वभाव मेल के लिए भी राशि स्वरूप उपयोगी है। ✨ आपकी राशि कोई अखबार के कॉलम खबर नहीं है - यह वह चश्मा है जिससे आपका मन, जन्म से देखता आया है। इसे पहचानिए, इससे आप सिर्फ अपने जीवन पर होने वाले असर के अलावा, ऐसा क्यों हो रहा है इसको भी समझ पायेंगे।